वो स्त्री है

तुम पढ़ न सको 
उसकी आँखों में उदासी
वो सजा देगी इसके लिए 
नयनों में काजल की स्याही
न माप सको 
उसके अंतर्मन की पीड़ा
वो ओढ़ लेगी इतना श्रृंगार
वो स्त्री है जनाब 
खुद जलते हुए भी
तुम्हारे जीवन में प्रेम
बरसा सकती है .....

©ज्योति

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